Sunday, October 12, 2008

Madhurima

मदुरिमा मकांत मैं न होती
तो शब्द विषपान बन गया होता !
वेदना हर्द्य मैं न होती
तो हर्द्य पाष्ण बन गया होता !
लालसा कुर्शी की न होती
तो नेता भगवान् बन गया होता !
वासना प्रेम को न छलती
तो प्रेम वरदान बन गया होता !!

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