Sunday, October 12, 2008

Madhurima

मदुरिमा मकांत मैं न होती
तो शब्द विषपान बन गया होता !
वेदना हर्द्य मैं न होती
तो हर्द्य पाष्ण बन गया होता !
लालसा कुर्शी की न होती
तो नेता भगवान् बन गया होता !
वासना प्रेम को न छलती
तो प्रेम वरदान बन गया होता !!
जीवन आउट ओएफ देत हो गया
शायद यमराज लेट हो गया
हम ने यमराज के पि.ई . को लिखा है
पर उसने भी कोइ जवाब नहीं दिया
फिर हमने यमराज को किया फोन
तो वो बोला कोण
हम बोले परभू अस्पताल मैं पडा हूँ
मौत की लाइन मैं खडा हूँ
जल्दी से आओ जिन्दगी और बीमारी दोनों से छुटकारा दिलाओ
यमराज बोले इंतजार मेरा करना
मैं आऊगा और तुम्हारे प्राणों को
हर ले जाऊगा
जान लेना तो ईजी है
पर क्या करूँ
मेरा सारा स्टाफ जम्मू कश्मीर मैं बीजी है!!!!